चलती टेढ़ी मेढ़ी राहों पे ,
मैं जा पहुंची उस दोराहे पे ,
समझ में न आई यह बात की किस पथ पर जाउँ ?
एक तरफ है सुन्दर स्वपन अपनों का ,
उनके लिए कुछ कर दिखाने का ,
इस कठोर दुनिया को चुप कराने का ,
कुछ कर गुजरने के सपने से पार पाने का ,
मुश्किलों को लाँघ कर जीत जाने का |
समझ में न आई यह बात की किस पथ पर जाउँ ?
दूसरी तरफ है वो इच्छा ,
जो हमेशा कहीं दिल में बसी थी ,
जो ना कभी इस समाज को जची थी .
वो इच्छा जिसमे जूनून की ना कोई कमी थी ,
पर बंदिशें हज़ार उसपे पड़ी थी |
समझ में न आई यह बात की किस पथ पर जाउँ ?
निर्णय लेने के वक़्त बस यही सोच पाई ,
बहुत जीली औरों के लिए अब बात तेरी है आई ,
कब तक डरेगी दुनिया से ,
कब तक औरों की सुनेगी ,
तेरा जीवन है तेरी सोच है ,
आखीर कब तक समाज की बंदिशों में रहेगी?
भूल जा दोराहे को ,
अपने मन की सुन ,
इच्छा को अपना,
और नए आसमान के सपने बून |
वो सपने जिसपे तेरा अधिकार है ,
जिनके पूरे होने के लिए तूने किया इंतज़ार है,
अब डर किस बात का,
आगे बढ़ ,
थाम ले उस सपने को और इस उन्मुक्त गगन मे उडती चल.......
मैं जा पहुंची उस दोराहे पे ,
समझ में न आई यह बात की किस पथ पर जाउँ ?
एक तरफ है सुन्दर स्वपन अपनों का ,
उनके लिए कुछ कर दिखाने का ,
इस कठोर दुनिया को चुप कराने का ,
कुछ कर गुजरने के सपने से पार पाने का ,
मुश्किलों को लाँघ कर जीत जाने का |
समझ में न आई यह बात की किस पथ पर जाउँ ?
दूसरी तरफ है वो इच्छा ,
जो हमेशा कहीं दिल में बसी थी ,
जो ना कभी इस समाज को जची थी .
वो इच्छा जिसमे जूनून की ना कोई कमी थी ,
पर बंदिशें हज़ार उसपे पड़ी थी |
समझ में न आई यह बात की किस पथ पर जाउँ ?
निर्णय लेने के वक़्त बस यही सोच पाई ,
बहुत जीली औरों के लिए अब बात तेरी है आई ,
कब तक डरेगी दुनिया से ,
कब तक औरों की सुनेगी ,
तेरा जीवन है तेरी सोच है ,
आखीर कब तक समाज की बंदिशों में रहेगी?
भूल जा दोराहे को ,
अपने मन की सुन ,
इच्छा को अपना,
और नए आसमान के सपने बून |
वो सपने जिसपे तेरा अधिकार है ,
जिनके पूरे होने के लिए तूने किया इंतज़ार है,
अब डर किस बात का,
आगे बढ़ ,
थाम ले उस सपने को और इस उन्मुक्त गगन मे उडती चल.......